(तर्ज : बस होती रहे मुलाकत)
देना हो तो दीजिये, जन्म-जन्म का साथ मेरे सिर पे रख दो मैय्या, अपने ये दोनों हाथ ।।
इस जन्म में सेवा देकर, बहुत बड़ा अहसान किया, तूं ही नैय्या तूं ही खवैय्या, मैंने तुम्हें पहचान लिया,
मेरा रस्ता रोशन कर दे, छायी अंधियारी रात ।। 1 ।।
झुलस रहे हैं गम की धूप में, प्यार की छाया कर देना, बिन पानी के नाव चले ना, अब पतवार पकड़ लेना, हम साथ रहे कई जन्मों, बस रखना इतनी बात ।। 2 ।।
हमने सुना है शरणागत को, आपने गले लगाती हो, ऐसा हमने क्या मांगा जो, देने में सकुचाती हो, चाहे सुख में रखा या दुःख में, बस होती रहे मुलाकात ।। 3 ।।