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अर प्रभु स्तवन
अर जिनराज। मोनें प्यारा लागै छै जी मोनें वाल्हा लागे छै जी अर जिनराज ॥
1. अर जिन कर्म-अरी नां हंता, जगत उधारण जहाज। मोनें वाल्हा लागे छै जी अर जिनराज ॥
2. परीषह उपसर्ग रूप अरी हण, पाया केवल पाज। मोनें वाल्हा लागे छै जी अर जिनराज ॥
3. नैण न धापै निरखतांजी, इन्द्राणी सुरराज। मोनें वाल्हा लागै छै जी अर जिनराज ॥
4. वारु रे जिनेश्वर रूप अनूपम, तू सुगणा-सिरताज। मोनें वाल्हा लागै छै जी अर जिनराज ॥
5. वाण विशाल दयाल-पुरुष नीं, भूख तृषा जाए भाज। मोनें वाल्हा लागै छै जी अर जिनराज ॥
6. शरणै आयो स्वाम रै जी,अविचल सुख नै काज। मोनें वाल्हा लागै छै जी अर जिनराज ॥
7. उगणीसै आसू बिद एकम, आणन्द उपनों आज। मोनें वाल्हा लागे छै जी अर जिनराज ॥
(लय : देखो सहियां! बनड़ो ए नेमकुमार)