Daily Prayer (नित्य प्रार्थना)

नित्य प्रार्थना, आरती और मंत्रों का संग्रह — दैनिक पूजा-पाठ और साधना में उपयोगी। Daily prayer songs, aartis and mantras for everyday worship and spiritual practice.

Jain Mantra

Guru Vandana

यह नित्य प्रार्थना और दैनिक पूजा-पाठ का गीत है। Part of daily prayer and worship. गुरु वन्दना युग प्रणेता, युग प्रचेता, युग पुरुष लो वन्दना  विनयनत बद्धांजलि हम, कर रहे अभिवंदना । धन्य है सौभाग्य तुम से, कुशल अनुशास्ता मिले  दिव्य जीवन पा तुम्हीं से, भव्य शतदल हैं खिले ।  तपो युग-युग धर्म शासक, जयविजय […]

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Jap Sadhna Vidhi

यह नित्य प्रार्थना और दैनिक पूजा-पाठ का गीत है। Part of daily prayer and worship. जप साधना विधि १. वन्दे अर्हम. वन्दे जिनवरम्, वन्दे गुरुवरम् से प्रारम्भ । २. दिसा पूर्वाभिमुख, उत्तराभिमुख या ईशानकोण । ३. एकान्त तथा मक्खी मच्छर रहित स्वच्छ स्थान। ४. शस्त्र श्वेत या हल्के रंग के हो। आसन खद्दर या ऊनी।

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Jyotishiy Yog (Kary Karne Ke Liye)

यह नित्य प्रार्थना और दैनिक पूजा-पाठ का गीत है। Part of daily prayer and worship. विशेष सुयोग १. तिथि- २,३,७,१२,१५ वार-रविवार, मंगलवार, बुधवार, शुक्रवार नक्षत्र-भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वषाढा, चित्रा, अनुराधा, घनिष्ठा, उत्तरभाद्रपद, इनमें तीनों का सुयोग मिलने पर राजयोग बनता है, है, जो विशेष सिाद्धि दायक है। २. तिथि- १,५,६,१०,११ वार- सोमवार, मंगलवार, बुधवार, शुक्रवार

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Kalbhairav Ashtkam

यह नित्य प्रार्थना और दैनिक पूजा-पाठ का गीत है। Part of daily prayer and worship. देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् । नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ १॥ भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम् । कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ २॥ शूलटंकपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम् ।  भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ३॥ भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं  भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम् । विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं

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Kalyan Mandir Stotra (संस्कृत हिन्दी कविता रुप अर्थके साथ/

यह नित्य प्रार्थना और दैनिक पूजा-पाठ का गीत है। Part of daily prayer and worship. कल्याण-मन्दिर की साधनाः आचार्य सिद्धसेन दिवाकर रचित यह काव्य बहुत ही चमत्कारिक है। इसका स्मरण पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके सूर्यास्त होने के समय से लेकर रात्रि के दस बजे तक करें। लम्बे समय तक निरन्तर जाप करने

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Koti Jap Anushthan

यह नित्य प्रार्थना और दैनिक पूजा-पाठ का गीत है। Part of daily prayer and worship. कोटि जप अनुष्ठान (नमस्कार महामंत्र के सवा करोड़ जप का अनुष्ठान) (९०८ व्यक्तियों द्वारा १०८ दिन प्रतिदिन पांचों पदों की अलग-अलग ११ माला फेरने पर) प्रारंभ आषाढ़ शुक्ला १४ समापन   कार्तिक शुक्ला २ माला.   प्रतिदिन कुल ५५ माला दिशा.  उत्तर

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Loggass Path (Arth Sahit)

यह नित्य प्रार्थना और दैनिक पूजा-पाठ का गीत है। Part of daily prayer and worship. लोगस्स पाठ यह चौबीस तीर्थंकरों की स्तुति है। शासन-सेवक, सभी देव और देवियां इससे प्रसन्न रहते हैं। इसकी पूरी माला फेरने से विशेष लाभ होता है। १. लोगस्स उज्जोयगरे, धम्म तित्थ यरे जिणे।  अरहंते कित्तइस्सं, चउवीसंपी केवली ॥  लोक में

Vedic

Mahamrityunjay Mantra

यह नित्य प्रार्थना और दैनिक पूजा-पाठ का गीत है। Part of daily prayer and worship. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।  उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् Om Trayambakam Yajamahe Sugandhim pushti-vardhanam Urvārukam-iva bandhanāt Stymukshīya māmritāt Hindi Meaning: हम भगवान शिव शंकर की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो अपनी कृपा से पूरी दुनिया की

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Mahapragya Ashtkam

यह नित्य प्रार्थना और दैनिक पूजा-पाठ का गीत है। Part of daily prayer and worship. महाप्रज्ञ-अष्टकम् (युवाचार्य महाश्रमण) १. पुनीतान्तः प्रज्ञा गहनतम तत्त्वेषु निपुणा, श्रुतस्वाध्यायेन सुविदितरहस्यो विभुवरः । प्रशस्या शास्त्राणां सुषमतर-सम्पादन-सृतिः,  महाप्रज्ञः पूज्यो जिनपतिसरूपो गुरुवरः ॥ आपकी पुनीत अन्तःप्रज्ञा गहनतम तत्त्वों को जानने में निपुण है। आपने आगमों के स्वाध्याय से उनके रहस्यों को भलीभांति

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Mahavir Ashtkam

यह नित्य प्रार्थना और दैनिक पूजा-पाठ का गीत है। Part of daily prayer and worship. महावीर अष्टकम् यदीये चैतन्ये मुकुर इव भावाश्चिदचितः,  समं भान्ति ध्रौव्य व्यय-जनि-लसतोऽन्तरहिताः  जगत्-साक्षी मारग प्रकटनपरो भानुरिव यो,  महावीरस्वामी नमन पथ-गामी भवतु मे ॥ २. अताम्र यच्चक्षुः कमलयुगलं स्पन्दरहितं,  जनान् कोपापायं प्रकटयति वाऽऽभ्यन्तरमपि ।  स्फुटं मूर्ति यस्य प्रशमितमयी वातिविमला,  महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु

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