UpsargHar Stotra (Laghu)
उपसर्गहर स्तोत्र (लघु) (आचार्य भद्रबाहु स्वामी द्वारा विरचित) १. उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्मघणमुक्कं । विसहर-विसनिन्नासं, मंगल कल्लाण आवासं ॥ शासन पर होने वाले उपसर्गों को दूर करने वाला पाश्वं देवता जिनके चरणों में सेवक है, कर्म-रूप सघन बादलों से जो मुक्त है, महाविषधर भुजंग का विष जिनके नाम से दूर होता है, मंगल और […]