Kabhi Fursat Ho To Jagdambe
(तर्ज : बाबुल की दुआयें लेती जा….) कभी फुरसत हो तो जगदम्बे, निर्धन के धर भी आ जाना, जो रूखा सुखा दिया हमें, माँ उसका भोग लगा जाना।। ना छत्र बना सका सोने का, ना चुनड़ी घर में तारों जड़ी, ना पेड़े बर्फी मेवा है माँ, बस श्रद्धा है नैन बिछायै खड़ी, इस श्रद्धा की […]