Jain Mantras

Navanvik Adhyatmic Anushthan

नवान्हिक आध्यात्मिक अनुष्ठान विधि अनुष्ठान  प्रारंभ प्रथम दिन प्रातःकालीन सत्र से किया जाए एवं अनुष्ठान का समापन अन्तिम रात्रि के ५.३० बजे यानी पश्चिम रात्रिकालीन सत्र में किया जाए। प्रातः ९-३० से १०.०० तक (प्रतिदिन) चांदेसु निम्मलयरा, आइच्चेसु अहियं पयासयरा। सागरवरगंभीरा, सिद्धा सिद्धिं मम दिसंतु ॥ (५ चार पाठ) चंदेसु निम्मलयरा, सिद्धा सिद्धिं मम दिसंतु। […]