Jain Tirthankaras (जैन तीर्थंकर)

Dharmnath

15. Pandrve Tirthankar Bhagwan Dharmanath Ki Kahani

15thTirthnkar Bhagwan Shree Dharm Nath Ka Symbol ( Pratik) -Vajra भगवान् श्री धर्मनाथ तीर्थकर गोत्र का बंध धातकी खंड की पूर्व विदेह में भदिलपुर नामक समृद्ध नगरी थी। उसके पराक्रमी राजा सिंहरथ ने धर्मगुरुओं से जब सुना कि योद्धाओं को जीतना आसान है, किंतु आत्मा पर नियंत्रण पाना कठिन है, खूंखार शेर को पकड़ना आसान […]

Kunthu Nath

17. Satarh Ve Tirthankar Bhagwan Kunthunath Ki Kahani

17ve, Tirthankar Bhagwan Shree Kunthu Nath Ka Symbol ( Pratik)- Goat भगवान् श्री कुंथुनाथ तीर्थकर गोत्र का बंध पूर्व महाविदेह की खड्गी नगरी में प्रबल प्रतापी सिंहावह राजा थे। विशाल भोग सामग्री का उपभोग करते हुए अपनी प्यारी प्रजा की सुख सुविधा को जुटाने में वे सदैव संलग्न रहते थे। राजा को सन्तों का सम्पर्क

Arnath

18. Atthahar Ve Tirthankar Bhagwan Arnath Ki Kahani

18ve Tirthankar Bhagwan Shree Arnath Ka Symbol ( Pratik)- Nandavarta भगवान् श्री अरनाथ तीर्थङ्कर गोत्र का बंध भगवान् श्री अरनाथ का जीव पूर्व-विदेह क्षेत्र की सुसीमा नगरी के नरेश धनपति के रूप में था। उस भव में उन्होंने विशेष धर्म की साधना की। राज्य भी किया, किन्तु सहज बन कर। लोगों को इतना नीति-निष्ठ बनाया

Munisuvrath

20. Bees Ve Tirthankar Bhagwan Munisuvrath Ki Kahani

20veTirthankar Bhagwan ShreeMuni Suvart Ka Symbol(Pratik) -Tortoise भगवान् श्री मुनिसुव्रत तीर्थंकर गोत्र का बंध भगवान् मुनिसुव्रत के जीव ने पश्चिम-महाविदेह में चम्पा नरेश सुरश्रेष्ठ के जन्म में उत्कृष्ठ कोटि की साधना की थी। प्राप्त सत्ता को ठुकरा कर आपने मुनि-व्रत को ग्रहण किया । विभिन्न अनुष्ठानों से आर्हत्-धर्म की प्रभावना की। महान् कर्म-निर्जरा कर उन्होंने

ArishtNemi

22. Bais Ve Tirthankar Bhagwan Arishtnemi Ki Kahani

22ve Tirthankar Bhagwan Shree ARISHTNEMI ka Symbol (Pratik)-Conch,(Shankh) भगवान् श्री अरिष्टनेमि को आज के इतिहासकार भी महापुरुष के रूप में स्वीकार करते हैं। 24 तीर्थंकरों मे इक्कीस को प्रागेतिहासिक काल के मानते हैं। किन्तु, बाइसवे तीर्थंकर श्री अरिष्टनेमी की ऐतिहासिकता के बारे में सब एकमत है। उनके तीर्थङ्कर गोत्र का बन्ध ,शंख राजा के भव

Mahaveer, Mahavir

24, Chobis Ve Tirthankar Bhagwan Mahaveer Ki Kahani

sybmol(प्रतीक )of Tirthankar  Mahavir- Lion भगवान् श्री महावीर भगवान् ऋषभ तीसरे आरे (काल विभाग) के अन्त में हुये थे। और भगवान् महावीर ने चौथे आरे के अन्त में जन्म लिया था। इस अवसर्पिणी काल के वे अंतिम तीर्थङ्कर थे। आज का जैन-दर्शन उनकी वाणी का ही फलित है। भगवान् महावीर इतिहासकारों की दृष्टि में महान्

Naminath

21. Ikkis Ve Tirthankar Bhagwan Naminath Ki Kahani

21ve Tirthankar Bhagwan Shree Neminath Ka Symbol (Pratik)-Blue Lotus भगवान् श्री नमिनाथ तीर्थंकर गोत्र का बंध पश्चिम महाविदेह की कोशांबी नगरी के राजा सिद्धार्थ ने अपने राज्य की उत्तम व्यवस्था कर रखी थी। पारस्परिक विग्रह समाप्तप्रायः था। राज्य में किसी भी वस्तु का अभाव नहीं था। हर व्यक्ति अपने-अपने स्थान पर संतुष्ट थे। एकदा संसार

Bhikshu Swami

Kelawa Ke Yogi Tere Nam Ka Sahara Hai

केलवा के योगी तेरे नाम का सहारा है  नैया मझधारा में  है दूर किनारा है  तेरे ही हवाले अब जीवन हमारा है।।   मरूधर की माटी की ये अजब निशानी है  भिक्षु की जीवन गाथा प्रेरक कहानी है। देश में परत‌न्त्रता का हो गया प्रवेश था।  शिथिल विचारों से धर्म निस्तेज था?  मारवाड़ी भूमि से वही

Bhikshu Swami

Terapanth Ka O Savriya

(तर्ज -वृंदावनका   कृष्ण कन्हैया ) तेरापंथ का ओ सांवरिया जनजीवन का रखवारा  मर्यादा पुरुषोतम भिक्षु जग की नैया खेवन हारा युग का नेता ,युगका वेता ,युगका सर्जनहारारे।  युग पर छाप आपकी रखकर तू सुरधाम सिधारारे  जग ‘तेरा इतिहास गा रहा तूने कैसा जादू डारा रै तेरा संयम तेरी दृढ़ता जगमग जीवन‌ तेरा रे  वही रचना

Bhikshu Swami

Om Bhikshu Om Bhikshu Japo Sada

(लय- परदेशी परदेशी ) ॐभिक्षु ऊं भिक्षु  जपो सदा-२ चाह फले मुक्ति मिले है नाम मंगल कारी विघ्न बाधा हारी  विघ्न बाधा हारी इसने लाखो नैया तारी ऊं भिक्षु ऊं भिक्षु जपो सदा-२  असहायों का भिक्षु नाम सहारा है।  घोर अमा में करता-दिव्य उजारा है  ॐ भिक्षु पंगु को पहाड़ चढ़ाता है  मूक मनुज को

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