Jain Tirthankaras (जैन तीर्थंकर)

Bhikshu Swami

Ud Ud Re Man Dev Lok Me

 (लय- उड़ उड़ रे म्हारा काला रे कांगला) उड उड रे -३मन देवलोक में ,भिक्षु रा दरशण कर आवा-२ १.गाँव कंटालिये म अवतरियो ,ज्ञान सुधास्यू घटने भरियो सुधरी स्यू निज पथ न वरियो, उण पथ म्हे चलता जांवा भिक्षु रा दरशण कर आवा-२  ② आगम ने आधार बणायो शुद्ध साध रो रुप जणायो  तेरा पंथ […]

Adinath

Jay Jay Bolo Nabhi R Lal Ri

(लय- अलख जगावा) जय -2 जय बोलोनाभि र लालरी-2 कटज्या करम तमाम  आदीश्वर रोनाम प्यारोलागे है…..माला नाम नाम रटता सिद्ध हुव सब काम प्यारो लागे पुन्याई रो पूत्तलो, ज्ञान रो है दिवलो धर्म धूरी अवतार, प्यारो लागे हैआदीश्वर रोनाम वनिता दूलारों मरुदेवा प्यारो । स्वपन कियो, साकार पहला ही राजा,सिखाई रिवाजा, ब्राह्री सुन्दरीरोतात, प्यारो लागे

Bhikshu Swami, Guru

Dena Hai To Dijiye Janm Janm Ka Sath

देना है तो दीजिये जन्म 2 का साथ  मेरे सिर पर रखदो गुरु वर अपने ही दोनो  हाथ झुलस रहे हैं गमकी धूप में प्यार की छैंया करदे तू  बिन पानी के नाव चलेना । अब पतवार पकडले तू  मेरा रस्ता रोशन करदे छाई अंधियारी रात इस जनम में सेवा देकर  बहुत बड़ा अहसान किया 

Mahavir Swami

Aao Prabhu Mohe Darshan Do

( लय- बारबार तोहे  क्या समझाऊं) आओ प्रभु मोहे दर्शन दो, मै कब से करु पुकार  तुम बिन प्रभुजी कौन करे कर भवपार  हाथ जोड़ में अर्ज करूं सुन जग के पालन हार  (तुम बिन प्रभुजी कौन करे भव पार ) लख चोरासी फिर कर आयो पास तेरे  जन्म मरण दुख मेटो दीनानाथ मेरे  छल

Mahavir Swami

Vartman Ko Vardhman Ki Aavshykata Hai

वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता हर आत्मा दुखी है, सुख शांति खो चुकी है, परदृष्टि होके व्याकुल, महावीर पे रुकी है महावीर… महावीर…महावीर…महावीर… हिंसा पीडित विश्व राह महावीर की तकता है, वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता है पापों के दलदल में फ़ंसकर धर्म सिसकता है, वर्तमान…  हिंसा के बादल छायें संसार पर, सर्वनाश के दुनिया

Mahavir Swami

Mahavir Charno Me Karte Naman

(लय -बहुत प्यार करते है तुमको सनम) महावीर-चरणों में करते नमन  देते हो नाथ! तुमही  सबको शरण 1 अंधकार में सूरज बन भू पर आए।  तपती दुपहरी में बन घन मंडराये ।  त्रिशला की गोद में था हुआ अवतरण ।। राजमहल तजकर संजम अपनाया।  भोगो से त्याग का पथ श्रेष्ठ बतलाया ।।  किया परम संपदा

Mahavir Swami

Jay Jay Jagdishwar Mahavir

(लय- धर्म की लौ जलाए हम) जय जय जगदीश्वर महावीर -2 तीर्थकर बन गए तोड़ कर कर्मों की जंजीर  चंड सर्प को डंक लगाया प्रभु ने करुणा रस बरसाया,  हुई नकिञ्चित कमपित् काया, राग द्वैष की पड़ी न छाया   द्वेषकी समता और सहजता से बन गये शांत गम्भीर ② अनेकान्त मय अमृतवाणी अंकित उसकी अमिटकहानी 

Mahavir Swami

Arhata Ke Shikher Shree Mahavir Hai

(धुन : दिल के अरमां…) अर्हता के शिखर श्री महावीर हैं, शिखर को देखे, बने वह वीर है ॥ धन्य त्रिशला पारगत मातेश्वरी । खुले नृप सिद्धार्थ के तकदीर है ॥ चरम तीर्थंकर परम-पावन प्रभु । शान्ति समता के समंदर क्षीर है ॥ जगत के सब प्राणियों के मित्र हैं। त्याग तप करुणामयी तसवीर हैं

Mahavir Swami

Veer Aayenge

( लय- राम आयेगे) मेरी झोपड़ी के भाग के भाग, आज खुल जायगे  वीर आयेगे-2 वीरआयेगें वीर आयेंगे -2 – वीरआयेगेंतो अंगना सजाऊंगी, माणक मोती सै प्रभुकों मै बधाऊंगी  मेरे जन्मो कसारे पाप मिट जायेंगे, वीर आयंगे-2 मेरी झोपड़ी— मेरे वीर को में पालना झूलाऊगी,  माता त्रिशला  की लोरीमै सुनाऊंगी  मेरे रोम-2 में प्रभु बस

Mahavir Swami

Vir Tera Nam Humko Jan Se Bhi Pyara Hai

(लय -एक तेरा नाम) वीर तेरा नाम-2 हमको जान से भी   प्यारा ।  तू है तो हर सहारा है वीरं तेरा नाम…. ① क्षत्रिय कुल का लाल-2 माता त्रिशला का दुलारा है  तू है तो हर सहारा है वीर तेरा नाम…. ② भव-भव में भटका हूँ कहीं चैन ना पाऊ मै तो हार गया। दुखियों

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