Shiv Ji

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Damru Wale Ki Mahima Hai Nyari

।। श्री शंकर वन्दना ।। (तर्ज-मणिहारी का भेष बनाया…) डमरू वाले की लीला है न्यारी,  इसे कहते है भोला भण्डारी ।। टेर ।। करके योगी को भेष, रहता हरदम महेश,  ये तो नन्दी की करता है सवारी ।।१।। ऊँचे पर्वत शिखर, भोले बाबा का घर,  संग रहती हिमाचल दुलारी ।।२ ।। लागी कैसी लगन, राम […]

Shiv Ji

Rudrashtakam

 श्रीरुद्राष्टकं तुलसीदासकृतम्  नमामीशमीशाननिर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाश माकाश वासं भजेऽहम् ॥ १॥ निराकार मोंकारमूलं तुरीयं गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् । करालं महाकालकालं कृपालं गुणागारसंसार पारं नतोऽहम् ॥ २॥ तुषाराद्रि संकाशगौरं गभीरं मनोभूत कोटिप्रभा श्रीशरीरम् । स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारुगङ्गा लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ ३॥ चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।

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