यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.
तर्ज (Tune): होठो से छु लो तुम
भजन के बोल / Lyrics
हे गणाधिपति गुरुदेव, तुझे समझ नहीं पाये।
हे महाप्राण गुरुदेव, क्या महिमा बतलाये।
हे भिक्षु भक्त तुलसी, क्या गण गरिमा गाये
अंतरा
बालक वय में तुमने परिवार को त्याग दिया, यौवन वय में तुमने गण को संभाल लिया।
अपने पद को तुमने जीते जी त्याग दिया ॥ हे गणाधिपति ॥१ ॥
महावीर की वाणी का, तुमने संचार किया,गौतम की तरह तुमने, भिक्षु का गान किया।
अणुव्रत प्रेक्षा के लिए, जीवन भर काम किया ॥ हे गणाधिपति ॥२॥
भक्तों की भावना को, तुमने स्वीकार किया,
पैरों में पदम लेकर, धरती को नाप लिया।
तेरापंथ के खातिर, जीवन बलिदान किया ॥ हे गणाधिपति ॥३ ॥
जन के मन को देखा, बस तुम ही नजर आये,
दशों दिशा देखी, इक तुम ही नजर आये।
आकाश में देखा तो, चंदा में नजर आयें ॥
हे गणाधिपति ॥४॥
हे अजर अमर स्वामी तुम हो अंतर्यामी, हे राष्ट्र संत तुलसी, घट घट में तुम यामी। साक्षात नहीं फिर भी, तुम साथ हमारे हो ॥ हे गणाधिपति ॥५ ॥