यह जैन तपस्या और अनुमोदना के अवसरों पर गाया जाने वाला आध्यात्मिक गीत है। A spiritual song for Jain Tapasya and Anumodana.
जाग बंदे ! जाग
(तर्ज – एक तेरा साथ…..)
साध्वी अणिमाश्री
जाग बंदे ! जाग, दुर्लभ नर-तन तूने पाया है। यह हीरा हाथ आया है ।।
खो रहा क्यों नश्वर भोगों में, अनमोले जीवन को ।
तीखें कांटों से भर रहा है क्यों, खिलते उपवन को ।
अब भी संभल जा तू…. महापुरुषों ने बतलाया है ।।
जिसको तू मन में मान रहा घर अपना वो मुसाफिर खाना है।जाना होगा जग से तजकर यूं सारा,ये माल खजाना है।
पलभर का न भरोसा…. यह तो बादल जैसी छाया है ।।
कितनी बार जगाया, फिर भी तूं कब सेअब तक सोया है।
वैसा ही फल निश्चित पाएगा अरे! जो जैसा बोया है ।
अब भी भरलै दामन “अणिमा” मौका तूं ने पाया है ।।