Jhuthi Jag Ki Maya

यह जैन तपस्या और अनुमोदना के अवसरों पर गाया जाने वाला आध्यात्मिक गीत है। A spiritual song for Jain Tapasya and Anumodana.

झूठी जग की माया

तर्ज (Tune): मेरे मन की गंगा

भजन के बोल / Lyrics

झूठी जग की माया, और मिट्टी की यह काया रे। बोल बन्दे ! बोल, तूने जाना क्यों नहीं।
१. खाली हाथ तूं आया जग में, खाली हाथ ही जायेगा, चुग जायेगी खेत ये चिड़िया, हाथ मसल रह जायेगा। पग पग खड़े लुटेरे, तूं लूट जाना रे नहीं।
बोल बन्दे !…… ॥
२. दुर्लभ मानव जन्म मिला है, चिन्तन शक्ति है पाई, करना है सो करले बन्दे ! पलक झपकने को आई।
बड़े कीमती हर क्षण यों, गंवाना रे नहीं ॥
बोल बन्दे !…… ।।
३. मात-पिता, भाई-बन्धु जन, साथ नहीं कोई जायेगा, जैसा कर्म करेगा वैसा, फल तूं आगे पायेगा। मोह-माया के दल दल में, फंस जाना रे नहीं ॥
बोल बन्दे !…… ।।
४. जिनशासन का मिला खजाना, दर २ क्यों ठोकर खाता, जोड़ ले नाता अब प्रभुवर से, सुख पाना यदि तू चाहता।
तर जायेगा बेड़ा तेरा, मुझाना नहीं ॥
बोल बन्दे !…… ।।

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