यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints.
तर्ज:- (सर पै टोपी लाल)
कब से करें पुकार, वीर महावीर तुम्हारे द्वार,
हो जरा सुन लेना । महिमा सुनी अपार,
कि तुम हो भक्तों के रखवार, हो जरा सुन लेना ।
हो लाखों उठाये गम, फिर भी निराश हम, तेरे पास आये हैं.
जरा महर कीजिये, शरण हमें लीजिये. दुःख के सताये हैं,
देखा ये संसार नहीं है इसमें कोई सार ॥ १ ॥ हो जरा ॥
हो कर्मों के जाल में, जग के जंजाल में, फँसते ही जाते हम,
अनाथों का नाथ है, हमें तेरा साथ है, दूर करो दिल के गम,
जपके मंत्र नवकार बोलते तेरी जय जयकार ॥ २ ॥ हो जरा ॥
हो सत्यता की राह पर, बढ़े चले हम सफर,
रुकने न पायें हम, गली गली घूमकर, आज झूम झूम कर, प्रभु गुण गायें हम,
दीर्ना के रखवार “वीर मण्डल” के तुम आधार ॥ ३ ॥ हो जरा ॥