Nami Prabhu Stavan 21

यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints.

21

नमि प्रभु स्तवन
प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे। मुझ प्यारा प्राण आधारा ॥
1. नमिनाथ अनाथां रा नाथो रे, नित्य नमण करूं जोड़ी हाथो है। कर्म काटण वीर विख्यातो, प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे॥
2. प्रभु ध्यान सुधारस ध्याया रे, पद केवल जोड़ी पाया रे। गुण उत्तम-उत्तम आया, प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे॥
3. प्रभु बागरी वाण विशालो रे, खीर-समुद्र थी अधिक रसालो रे। जगतारक दीनदयालो, प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे॥
4. थाप्या तीरथ च्यार जिनीन्दो रे, मिथ्या-तम हरण मुनीन्दो रे। ज्यांनें सेवत सुर-नर वृन्दो, प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे॥
यो।
5. सुर अनुत्तर विमाण नां सेवै रे, प्रश्न पूछ्यां उत्तर जिन देवै रे। अवधिज्ञान करी जाण लेवै, प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे॥
6. तिहां बैठा ते तुम ध्यान ध्यावै रे, तुम योग-मुद्रा चित चावै रे। ते पिण आपरी भावना भावै, प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे।॥
7. उगणीसे आसोज उदारो रे, कृष्ण चौथ गाया गुणधारो रे। हवो आणंद हर्ष अपारो, प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे॥
लय- परमगुरु पूज्यजी मुझ प्यारा रे

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