यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints.
तर्ज (Tune): परदेशी परदेशी
भजन के बोल / Lyrics
ॐभिक्षु ऊं भिक्षु जपो सदा-२ चाह फले मुक्ति मिले
है नाम मंगल कारी विघ्न बाधा हारी
विघ्न बाधा हारी इसने लाखो नैया तारी
ऊं भिक्षु ऊं भिक्षु जपो सदा-२
असहायों का भिक्षु नाम सहारा है।
घोर अमा में करता-दिव्य उजारा है
ॐ भिक्षु पंगु को पहाड़ चढ़ाता है
मूक मनुज को वाणी वर मिल जाता है
है नाम मंगल कारी विघ्न बाधा हारी
विघ्न बाधा हारी इसने लाखो नैया तारी
ऊं भिक्षु ऊं भिक्षु जपो सदा-२
खाते पीते सोते जगते जो ध्याता है।
सांस सांस में भिक्षु भिक्षु जो गाता है
कठिन परिस्थिति में वह नहीं घबराता
भिक्षु नाम से अन्तर पौरुष जग जाता
है नाम मंगल कारी विघ्न बाधा हारी
विघ्न बाधा हारी इसने लाखो नैया तारी
ऊं भिक्षु ऊं भिक्षु जपो सदा-२