यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.
शासन कल्प तरु…
तर्ज (Tune): भलकै भानुड़ै सो भाल
भजन के बोल / Lyrics
शासन कल्प तरु… उतर्यो मोहरां रो चरु। राखो-राखो हो रखवाली। बाबै भिक्षु रो उपगार, माना जीवन भर आभार। ज्यांरी सांवरी सूरत, तेरापंथ रो आधार ॥
अलबेलो शासन आपारों, सारां रै मन भावणो। मनहारो प्राणां स्युं प्यारो – लागै घणो सुहावणो। इण री ऊजली आभा स्युं – लेवां जीवन उजार ॥१ ॥
मात पिता सो आसरो – ओ नन्दन बन सो बास है, आश्वासन है दूबलां रो – सबला रो विश्वास है। अनुपम शीत धर सो है – सब ऋतुवां में सुखकार ॥२ ॥
गण आपांरो आपां गणरा – ओ आछो अनुबन्ध है। धागे में पिरोयी माला – सारी सो सम्बन्ध है। युवकां बालकां भायां बायां में – जागै भै संस्कार है ॥ ३ ॥
एक है आचार एक आचारज ही आण है, एक ही विचार एक – कायदो रु काण है। अपणै एकता ही एकता रो – सारो कारोबार ॥४॥
आण काण लोप करै शान अपनी सांवली, साध और श्रावकां में बात करें बाबली। उणनै रीड़ी वाला सेठिया रो जाव जोरदार ॥५ ॥
संधरी शालीनता में – लीनता है राखणी।
बारीकी स्यूं झांक – आंख पूरी – २ राखणी।
मेहता बाव बाला उमजी रो आंकल्यो आचार ॥६ ॥आस्था पर आंच श्रद्धाशील कियां आण दै,
ऐरे गैर बात ऊपर – ध्यान किया जाण दै। इ
ण में पटुवाजी रो – पोज आवै सामने साकार ॥७ ॥ –
आंचलियै री आस्था रु पन्नै री मरदानगी।
गोठीजी रो ज्ञान भंवरो वीरता री बानगी।
हनुमन्त री इकतारी – दप्तरी सो धार फार ॥८ ॥
भगती दूगड़ दूलजी री – बादरियै री बादरी,
विरधोजी जिरावला री – बहस बड़ी पादरी।
चन्दूबाई री चतुराई आवै – याद बारम्बार ॥९ ॥
आपणो है काम एक केन्द्र ने आरा घणो,
एकतान एक ध्यान, राधा बेध साधणो।
शेष सारी बातां गौण चाहे लाख हो हजार ॥१०॥
उतरती आलोचना सुणवानै बहरा कान हो,
उतरती पड़ती करवाने – बन्द ही जबान हो।
आपां खैर खवां रेवां – आदूँ पहर खबरदार ॥११॥
अप छंदा अवनीत – श्रावक श्राविका या साध हो,
जय जिनेन्द्र दूर स्युं आ आपणी मर्याद हो।
तोड देणी है तुरंत जिला बन्दी री कतार ॥१२॥
आ है कामधेनु गाय देख्यां लागे सोहणी
ओ है रतनां रो भंडार बणणो सखिया रोहिणी।
ओ है आम्रकुंज तुलसी छाया शीतल सुप्यार।
ओ है द्राक्षाकुंज तुलसी छाया शीतल सुप्यार ॥१३॥