यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints.
तर्ज : नीले घोड़े रा असवार
तेरापंथ रा प्रथम गणेश म्हारा ब्रह्मा विष्णु महेश
थाने पल पल ध्यावा म्हे थारा दरसण चावा म्हे ॥१॥
7. म्हारे तो मन मन्दिर रा है भीखणजी भगवान
हार-हियारा नयन सितारा, म्हारा जीवन प्राण
नहीं दूसरो नाम सुहावे, भिक्षु भिक्षु ही मन भावे-२
नित उठ शीश झुकावां म्हे ॥१ ॥
थारा दरशण
2. मारवाड़ रे सुरतरू री छाया में जो भी आवे
विह्न हरण मंगलकरण, बातें रो ध्यान लगावे
बांरा रोग शोक मिट-ज्यावे, परमानन्द सिन्धु लहरावे
सीनो चीर दिखावां म्हे ॥२ ॥
थारा दरशण
3. सिरीयारी रे कण कण में सांवरियो निज आवे चरमोत्सव पर बिना बुलायां मेलो सो भर जावे
ज्यू-ज्यू समय बीततो जासी, भिक्षु घट घट में वस जासी
साची बात सुणावां म्हे ॥३॥
थारा दरशण