1. Tara Ri Chunadi 2. Kajal 3. Nagin

यह विवाह गीत है जो शादी, मांगलिक कार्यक्रमों और पारिवारिक उत्सवों में गाया जा सकता है। A traditional wedding song for marriage ceremonies and family celebrations.

1,तारां री चुन्दड़ी
नवल बना जयपुर जाज्यो जी बालक बना जयपुर जाज्यो जी
आतां तो ल्याज्यो तारा री चूनड़ी आता तो ल्याज्यो जाली री चुन्दड़ी
नवल बनी कुणासार देखी ओ बालक बनी २
कुणासा ल्याया जाली री चून्दडी २
नवल बना भाभीसा र देखी ओ चतर बना भाभी सा र देखी ओ
जेठ सा ल्याया रबड़ री चुन्दडी – २
नवल बनी भांत बतावो ए बालक बनी – २
कीसीक रंग री जाली री चुन्दडी – २
नवल बना हर्या हर्या पल्ला ओ बालक बना – २
कसुमल रंग री जाली री चुन्दडी – २
नवल बनी ओढ़ बतावो ए, बालक बनी – २
किसीक सोव जाली री चुन्दड़ी – २
नवल बना किस विध ऑढाँ ओ निजर थारी मायड़ री बुरी
नवल बनी महला म ओढो ए २ बठ तो नीरखां जाली री चून्दडी २
नवल बना महल अन्धेरो ओ २ कियां तो नीरखो जाली री चुन्दडी
नवलबनी लाइट लगास्या ए २ पछतो नीरखां तारी री चुन्दडी २
नवल बनी ओढर उतर्या ओ २ नीजर थांरी भाभी री बुरी २
नवल बना सांभर जाज्यो जी २ बठ स्यूं ल्यावो नमक री पुड़ीया २
नवल बना नागौर जाज्यो जी २ बठ स्यूं ल्यावो मीर्ची री पुड़ीया २ 
नवल बना म्हां पर वारो जी, नजर म्हारी जाव लारली गलीयां – २
2 ,काजल 
काजल भरीयौं कुंपलो, कोई पड्यो पलंग र हेट, 
कोरो काजलीयो । 
मं म्हार बनासा न बरजीयो, थे ऊंदाल मती आय, 
कोरो काजलीयो । 
ऊंदाल्या म गर्मी पड़ २ कोई रात्यूं माछर खाय, कोरो काजलीयो । 
म म्हार बनासा न बरजीयो, थे चौमास मती आय, 
कोरो काजलीयो । चौमास की ऋतु बुरी २ कोई रात्यूं बरस मेह, कोरो काजलीयो । 
म म्हार बनासा न यूं कियो, थे सीयाल भल आय, कोरो काजलीयो । 
सियाल री ऋतु भली, कोई ओढ़ सिरख सोय जाय, कोरो काजलीयो । काजल भरीयो कुंपलो कोई
2.नागिन
बना हस्ती जी, बना घुड़ला जी 
बना घुड़ला र घमस पधार जी, 
म्हान टीको घड़ा‌द्यो सेटींग रो । टीको हीरा से जड्यो, टीको लालां से जड्यो टीको जड्यो लाल लख चार जी म्हान टीको 
बना रात गई आधी रात गई, थे मोड़ा किस विध आय जी – म्हान टीको
बनी रात गयो ए बनी रात गयो बनी गयो सनिमा होल रे नागिन को खेलो देखण न 
बना क्या देख्यो बना क्या देख्यो बनी देख्यो कालो नाग रे, 
बम्बी पर सर्प डोल रय्यो बना हम भी चलें, बना हम भी चलें 
बना चलें सिनेमा होल रे, नागिन को खेला देखण न बनी मर्द घणा ए, बनी मर्द घणा ए मर्दा रो अन्तन पार ऐ, नागिन को खेलो देखण न बना मर्द हो जांबा, बना मर्द हो जावां बना कर मर्दाना भेष रे नागिन को खेलो देखण न

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