मत कर माया को अहंकार ,मत कर कायाको अभिमान ,काया थारी गार से काची -2,हो काया थारी गार से काची,जैसे ओस रा मोती
झौंका पवन का लग जाय, झपका पवन का लग जाय,काया धूल हो जासी, हो काया थारी धूल हो जासी
1.ऐसासख्त एक महाराज,जिसका मुल्कों पे राज,जिन घर झूलता हाथी,जिन घर झूलता हाथी, हो जिन घर झूलता हाथी, उन घर दिया न बाती,
झौंका पवन का लग जाय,झपका पवन का लग जाय काया थारी धूल हो जासी, हो काया थारी धूल हो जासी
2.खूट गया सिन्दडा रो तेल,बिखर गया सब निज खेल,बुझ गई दिया की बाती,
झौंका पवन का लग जाय ———
3.झूठा माई थारो बाप, झूठा सकल परिवार, झूठा कूटता छाती, झौंका पवन का लग जाय झपका पवन का ———-
4.बोल्या भवानी हो नाथ, गुरु जी ने सिर पे धर या हाथ जिन से मुक्ति मिल जासी,-2, हो जिन से मुक्ति मिल जाती जैसे ओस रा मोती,मत कर माया को ——