(तर्ज : सावन का महीना…..)
आसोज का महीना, नवरात्रि की धूमधाम । भक्तो के संग चालो, माँ सांचल के दरबार ।। भक्तो के संग चालो, माँ सांचल के दरबार।।
शीश मुकुट माँ के, छत्र विराजै, कानों में कुन्डल माँ के, गले हार साजै। माँ के दर्शन करके, सब भक्त करै जयकार ।।1।।
भक्तो के संग…..
लाल चूनड़ माँ की, जरी गोटा सोहे, चूनड़ की चमचम मैय्या, अति मन मोहे। माँ का रूप निरखनै, सब दौड़ दौड़कर आय।।2।।
भक्तो के संग…..
मुखड़े पर नथली मां के, मन को लुभावे, शंख, चक्र, त्रिशूल मैय्या, हाथो मे राखे। सिंह सवारी चढ़ कै, माँ दर्शन देदो आज
भक्तो के संग…..
अर्जी लेकर मैय्या, आये तेरे द्वारे, स्वीकार कर लो माँ, दया भाव रखके । “भक्तो” की यह विनती, माँ रख दो सिर पर हाथ ।।4।। “भक्त मंडल” की विनती, माँ रख दो सिर पर हाथ ।।
भक्तो के संग…..