मैय्या जी से मिलने का
(तर्ज : बाबुल का ये घर….).
मैय्या जी से मिलने का, नवरात्री बहाना है, दर्शन करने को हमें, ओसियां जी जाना है ।।
सूरज में ढूंढा उन्हें, चंदा में पाया है, तारों की झिलमिल में, मेरी मैय्या का ठिकाना है।।
महलों में ढूंढा उन्हें, मंदिरों में पाया है, ओसियां के मन्दिर में, मेरी मैय्या का ठिकाना है।।
जंगलों में ढूंढा उन्हें, पहाड़ों में पाया है, भक्तों के दिल में तो, मेरी मैय्या का ठिकाना है।।
तुम्हीं मेरे मात पिता, तुम्हीं मेरे बन्धु सखा, ये दुनियां वाले क्या जाने, मेरा दिल तो दिवाना है।।
मैय्या जी के मन्दिर में, संच्चियां संच्चियां गाऊं मै, जब भी वो बुलायेगी, मुझे दौड़े चले जाना है ।।4।।