(तर्ज : करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं)
आया हूँ शरण में तेरी, उपकार करो माँ, करूणा की सागर हो मेरा, उद्धार करो माँ बेड़ा पार करो माँ हे ! संच्चिया माता, है! ओसियां वाली ।।
तुमने ना जाने कितनों की, बिगड़ी संवार दी, विनती सुनी है उसकी, माँ जिसने पुकार दी, मै भी हूँ बालक तेरा, मुझे प्यार करो माँ ।। करूणा
तेरे जैसा दानी नहीं, कोई संसार में, है क्या कमी माँ, तेरे सांचे दरबार में, अपनी ममता से मेरा, भंडार भरो माँ ।। करूणा….
तेरे सिन्दूर ने दी है माँ, सूरज को लाली, चंदा ने चांदनी माँ तेरी, बिन्दीया से पाली, तारो की चुनड़ी ओढ़े, नमस्कार करो माँ ।। करूणा
ले हाथ मे त्रिशूल माँ, एक बार आ जाओ, हो सिंह पर सवार माँ, दर्शन दिखा जाओ, बस इतनी सी अर्जी है, स्वीकार करो माँ ।। करूणा …….