आयी रे आयी कीर्तन की यह
(तर्ज – माई न माई………..)
आयी रे आयी कीर्तन की यह, शाम सुहानी आयी, मैयाजी की पावन महिमा, सब भक्तों ने गायी, जय जय माँ-माँ-माँ, सांचल माँ-माँ-माँ।।
जय जय माँ-माँ-माँ.
शेर सवारी करने वाली, मैय्या मन को भाये, नयनों से अमृत मय झरना, भक्तों पर बरसाये, उस अमृत की बुंद-बूंद ने-2, सब की प्यास बुझायी।।
मैय्याजी की पावन महिमा…
फूलों का श्रृंगार सजाकर, छप्पन भोग लगाते, श्रद्धा से हम लाल चुनड़िया, मैय्या जी को चढ़ाते, सिलीगुड़ी का यह प्रांगण-2, सब को है सुखदायी।। मैय्याजी की पावन महिमा.
कीर्तन सुनने भक्त अनेकों, दूर-दूर से आते, आयोजक बनने के खातिर, अपना नाम लिखाते, जिसके नाम की लोटरी-2, उसने ही ज्योति जगायी।। मैय्याजी की पावन महिमा…
मीठे मीठे भजन सुनाकर, “कमल” तुम्हें रिझाए, ऐसा दो वरदान ये मंडल, आगे बढ़ता जाए, “कमल” कहे माँ हम भक्तों ने-2, तुम से आस लगायी।। मैस्याजी की पावन महिमा