He Gouri Sut Balkari The Arji Suno Hamari

तर्ज : सूरज कब दूर गगन से……

हे गौरी सुत बलकारी, थे अर्जी सुनो हमारी, उत्सव में आज पधारो, थे सारा काज संवारो, आओजी….. बिनायक आ ज्यावो, भजनो में थे रम ज्यावो ।। है कीर्तन की तैयारी, म्हे जोवां बाट तिहारी, कर मूसे की असवारी, आ ज्यावो हे शुभकारी, थे रणत भवन स्यूं आओ, खुशियां रो रंग बरसाओ ।। 1 ।।
जय जयकार लगावां, थांनै भजनां स्यूं रिझावां, आदर सहित बिठावां, लडुवन रो भोग लगावां, रिद्धि-सिद्धि रा थे भंडारी, बरसादो किरपा थांरी ।। 2 ||
“भक्त मंडल” गुण गावै, थांनै सब स्यूं प्रथम मनावै,, झूमझूम हरसावै, चरणां में धोक लगावै, म्हे आया शरण तिहारी, थे रखल्यो लाज हमारी ।। 3 ।।

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