मैय्या का दरबार
(तर्ज : दुल्हे का सेहरा लगता है)
मैय्या का दरबार, सुहाना लगता है, मैय्या का श्रृंगार सुहाना लगता है पल भर में कैसे बदल जाते हैं ये, इनका हर अंदाज निराला लगता है ,मैय्या का—
हो रहा उत्सव यहां, यह झूमता है मन, गा रहे सब गीत मिलकर, भर गया आंगण मांगते तुमसे नहीं हम और कुछ ज्यादा, प्यार चाहे हाथ चाहे सर पे हम मैय्या मैय्या मेरी मैय्या आ जाओ एक बार दीवाना कहता है. मैय्या का….
कुछ भी नहीं है, पास मेरे, साथ तेरा है संसार है झूठ यहां, विश्वास तेरा है अर्जी है मेरी आपसे, बिगड़ी बना देना भक्त मण्डल को तुम नहीं, दिल से भुला देना