“Majhdhar Me Hai Naiya”

(तर्ज : संसार है एक नदिया……)

मझधार में है नैय्या, ओर वो भी पुरानी है, अब तुम को जगदम्बा, इसे पार लगानी है।।
ना जानूं मैं पूजा, ना मन ही पावन है, बस तुम्हें चढ़ाने को, आंखों में सावन है, एक फूल है मुरझाया, मरे दिल की निशानी है ।।1।।
तुम सााथ नहीं हो तो, ये जग ठुकराता है, रस्ते में पड़ा पत्थर, ज्यों ठोकर खाता है, ना झूठ है ये कोई, और ना ही कहानी है ।। 2 ।।
संसार के सागर को, माँ देख के डोलेगी, दुःख इतना जीवन में, कभी आंख तूं खोलेगी, आ लाल तेरी सूरत, आंचल में छुपानी है ।। 3 ।।

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