तर्जः होठों से छू लो.
हे ! स्वर की देवी माँ, संगीत की शिक्षा दो, एक गीत सुनाना है, वाणी में मधुरता दो।।
हे! स्वर….
अज्ञान ग्रस्त होकर, क्या गीत सुनाऊँ मैं, टूटे हुए शब्दों से, क्या भजन बनाऊँ मैं, गीतों के खजाने से, एक गीत की भिक्षा दो।।
हे! स्वर….
सरगम का ज्ञान नहीं, ना लय का ठिकाना है, मुझे आज सभा में माँ, एक गीत सुनाना है, कर आज कृपा मैय्या, मत स्वर की परीक्षा लो ।।
हे! स्वर….
तुम विद्या की देवी, मैं विद्यार्थी तेरा, पग पग पर बंधन है, मुझे कर्मों ने घेरा मैं शरण पड़ा तेरी, भावों की समीक्षा दो ।।
हे! स्वर….