Subah Subah Mujhko Jagata Hai Koi

सुबह सुबह मुझको जगाता है कोई

(तर्ज : चोरी चोरी सपनों)
सुबह सुबह मुझको जगाता है कोई प्यारी प्यारी बात बताता है कोई ,ऐसा लगता है मेरा काम हो गया मैय्या संग मेरा राम राम हो गया 2
बाते करनी बहुत थी पर समय की कमी थी उनको भी हड़बड़ी थी मजबुरी ये बड़ी थी -2
रूको – रूको मैय्या, थोड़ी देर सही इतनी – इतनी जन्दी क्या है, जाना है कही आये है तो थोड़ा सा आराम हो गया मैय्या संग मेरा राम राम हो गया । सुबह – सुबह
सेवा करते ही करते चरणों में पड़ा था पलके मेरी खुली तो सिराहने वों खड़ी थी धीरे-धीरे फिर मुस्काती है कोई… सपने से मुझको जगाती है कोई
ऐसा लगता है क्या कमाल हो गया मैय्या संग मेरा राम राम हो गया । सुबह – सुबह
चाहे कोई घड़ी हो सिर्फ तुझको पुकारा चोट मुझको लगी तो, आके तुमने संभाला धीरे – धीरे दर्द मिटाती है कोई. होले – होले मुझको बताती है कोई भक्त मण्डल को आभास हो गया मैय्या संग मेरा राम राम हो गया । सुबह – सुबह

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