( लय-जिसकी प्रतिमाइतनी सुन्दर वो कितना सुन्दर होगा)
नवरात्रों के नौ दिन मैया नौ रूपों में आती है-२
शेर सवारी करके मैया सबको दरश दिखाती है – 2
① कितना प्यारा कितना पावन ये त्यौहार निराला है – 2 चारो तरफ खुशियों के मेले – चारो ओर उजाला है-2
हर मन्दिर मे हरआंगन में माँ की ध्वजा लहराती है
कन्या पूजन कर करते हैं सब चुनड़ी लाल ओढ़ाते है
हलवा पूड़ी भोग चढ़ाते,घर में यज्ञ रचाते हैं बिन मांगे ही झोली सबकी खुशियों से भर जाती है
)
नरनारी सब सेवा करते हैं, मैया के गुण गाते है
आन् पधारो घर में ये अरदास लगाते है
अपने दुलारो की विनती को मैया ना ठुकराती है
आशा पूरण करने वाली भक्तो का भंडार भरे
मन चाहा वर देने वाली हर सपना साकारकरे
, बड़ी दयालु मेहरा वाली, अपनी मेहर बरसाती है
घर-मैं जगराते होते हैं मां की ज्योत जगाते है 2
जयमाता के जयकारो में तन और मन खोजातेहै नवरात्रों में माँ की भक्ति बिगड़े भाग्य बनाती है ☆