लिक्ष्मण के रे बाण लग्यो रै सगती रे लिछमण के,
लग्यो रे सक्ती रे पडयो रे धरतीरे लिछमण के,
ऐसो कोई वीर हो जो लिछमण न जिवावे रे
आधो आधो राज सवाई धरतीं रे
के तो जिवावै माता सीता सतवंतीरे,
के तो जिवावे हणुमान जती रे ,लिछमण के
काहे”से जिवावे रे, माता सीता सतवंतीरे ,
काहे से जिवाने हनुमान जती रे ,लिछमण के
सत से जिवाने माता सीता सतवंतीरे,
तपसे जिवाने हनुमान जतीरे लछमन के
संजीवनी बूटी हनुमान झट ल्याया
मूर्छा टूटी रे भाई लछमन की रे, लछमन के