(लय -सावन का महीना)
शिव भजन
भोले के हाथों में है भगतो की डोर 2
किसी को खींचे धीरे और किसी को खींचे जोर -2
मरजी है के इसकी हमको जैसे नचाये -2
जितनी जरूरत उतना जोर लगाये
ये चाहे किसी जितनी खींचे हम काहे मचाये शोर
किसी को खींचे धीरे और किसी को खींचे जोर 2
भोले तुम्हारे जब्से, हम हो गये है
गम जिंदगानी के कम होगये है२
बंध कर तेरी डोरी से हम नाचे जैसे मोर
खिच खींच डोरी जो संभाला न होता
हमको मुसीवत से निकाला न होता
ये चाहे जितना खीचे हम खिंचते इसकी ओर
दास न टूटे कैसे भक्तो से नाता
डोर से बंधा है कैसे प्रेम का धागा
तू रख इसपे भरोसा ये डोर नहीं कमजोर