भोला बाघम्बर वाला
(तर्ज : कजरा मोहब्बत वाला..)
भोला बाघम्बर वाला, शंकर है डमरूवाला,
माया है उसकी महान, है वो निराला भगवान ।
बैठा आंखों को मीचें, सांसों को ऊपर खींचे, करता ना जाने किस का ध्यान, है वो…… ।।
जट्टा में शिवशंकर के, गंगा बिहार करे,
माथे पे उनके देखो, चंदा उजियार करे
, कानों में कुंडल गले, सर्पों का हार पहने,
पीता वो भंग का प्याला, रहता सदा मतवाला,
अजब निराली है उसकी शान, है वो
अंग पे भोला अपने, देखो है भस्मी रमाये,
होता मगन जब ये, डम डम डम डमरू बजाये,
भांग धतुरा का वो, हरदम है भोग लगाये,
बाबा है भोला भाला, भक्तों का वो रखवाला,
अपने भक्त का राखे मान, है वो
सेवा में जिसके रहती, ये गिरिजा सुकुमारी,
कार्तिक गणेश दोनों, पत्रु हैं आज्ञाकारी,
देता वरदान सबको, है ये भोला भंडारी,
सारे जग का प्रतिपाला, देवों में देव निराला,
करते उसी का गुणगान, है वो