नंदी पे हौ के सवार
(तर्ज : अंजनी माँ के…)
नंदी पे हो के सवार, भोले जी चले गौरा के, साथ में लंबी बरात, भोले जी चले गौरा के।।
नंदी के घुंघरू छम छम बोले, भोले का डमरू डम डम बाजै, कंधे पे नाचै काला नाग, भोले जी.
भांत भांत के देख बराती, भूत प्रेत से जनता कांपी, मच गया हा-हा कार, भोले जी.
सभी देव दुंदुभी सुनाये, ढोलक शंख नगाड़ा बाजै, नाचे रे नौ – नौ ताल, भोले जी….. 11 3 11
गौरा ने श्रृंगार सजाया, फूलों का सुंदर हार बनाया, गले में डाली वरमाला, भोले जी……