Kanheiya Ek Bar Suna De Thari Bansuri

(तर्ज : मोरिया आच्छो बोल्यो रे)
कन्हैया, एक बार सुना दे थांरी बांसुरी, म्हारे हिवड़े में उठे रे हिल्लोर, कन्हैया ।।
कन्हैया, बंशी सुण राधा हो गई बावली, प्यारी लागे थांरी बंशी, नन्द किशोर, कन्हैया ।। 1 ।।
कन्हैया, थारै बिन्या ना म्हानें आवड़े, म्हारी आंखड़ल्यारी निन्दड़ली ले ई चोर, कन्हैया ।। 2 ।।
कन्हैया, जादू भरी है थांरी बांसुरी सुनकर नाचै म्हारै हिवड़े रो मोर, कन्हैया ।। 3 ।।
कन्हैया, मिनखांरी तो कांई बात है, आवे बांसुरी सुण इन्दर आसण छोड़, कन्हैया ।। 4 ।।
कन्हैया, शंकर रो डमरू थांरी बासुरी, जग में नाच नचायो दोन्यूं च्यारूं ओर, कन्हैया ।। 5 ।।
कन्हैया, “संच्चिया मण्डल” की आ है विनती, कर दे सारे जग में सदा सुहाणी भोर, कन्हैया ।। 6 ।।

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