Tum Araj Hamari Sun Lena

श्री रामदेव जी का भजन 
(तर्ज : मैं जट यमला)
तुम अरज हमारी सुन लेना ओ राम सा, नित नई प्रेरणा देना. तेरे गुणगान करते हैं, तुझ को नमन करते हैं ।
हम तो सर्वदा धाम रूणीचे आते रहे, तुम्हें व्यथायें, निज मन की सुनाते रहे यही स‌द्भावना जो है मनोकामना – 2, पूर्ण तुम्हीं कर देना 3, तुम अरज….. || 1 || 2,
अनन्त महिमा तेरी, श्रवण कर पाये है, गीत न जाने कितने, भक्तो ने गाये है – 2, जो भी शरण आये, तेरे हो के रह जाये 2 चमत्कार कर देना – 3, तुम अरज….. 11 3 11
कदम – कदम होठों पे, नाम तुम्हारा हो, निज मन का ये दृढ़ संकल्प हमारा हो – 2, भक्त सदा यही चाहें, तेरी छत्र छाया पाये – 2, तु ही दर्शन हमें देना.. दे देना 2, तुम अरज….. ।। 3 ।।

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