Lag Rahi Rang Bahar M

लग रही रंग बहार, छाई खुशियां अनपार यह नगर हुआ गुलजार, वीर जयन्ती आई है ॥
१. सौभाग्यवती मां त्रिशला, जिसने पाया यह नन्दन। रोशन धरती का कण कण, जन जन करता है वन्दन। मन भावन, दिन पावन, हर्षित सब तुम्हें निहार ॥
२. मानव मानव के हित में, मैत्री की धार बहाई। तुमसे पा यह संजीवन, मुरझी कलियां विकसाई । तुम नाविक, बन आए, कितने पहुंचे भव पार ॥
३. तेरे संदेश शुभंकर, पहुंचे हैं पार समन्दर । तुम दिव्य दिवाकर, तुमसे आलोकित हो रहा घर-घर। तव वाणी, कल्याणी, लाएगी नया निखार ॥
४. है अवसर आज सुनहरा, संकल्प सजाएं उजले । समता, समरसता, मैत्री, इस युग धारा को बदले। जिन शासन, नन्दन वन, में आती रहे बहार ॥
(तर्ज : ना कजरे की धार)

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top