हर्षित मन ध्यान लगाते, महावीर तुम्हारा। यह चढ़ा रहे चरणों में जीवन फूल हमारा ॥ जय त्रिशला नन्दन, जय त्रिशला नन्दन ॥
१. सिद्धार्थ कुल उजियारे, तुम पर नाज है। मां त्रिशला को चमकाया, प्रभु सरताज हैं। तुम जैन जगत् तीर्थंकर, सौभाग हमारा ॥
२. तुमने परखी भगवन्, जन-जन की पीर को। पलटा करके दिखलादी, जग तसवीर को। गूंजा उद्घोष अहिंसा का, पुरजोर तुम्हारा ॥
३. महादुष्कर प्रभु अभिग्रह, तुमने धार लिया। चन्दनबाला के नाम, सभी को तार दिया ॥ नारी जग है आभारी, उपकार तुम्हारा ॥
४. शिव सुख संधायक यह शासन गुलजार है। उपदेशों का अपनाने से उद्धार है। हम सांस सांस में जपते प्रभु नाम तुम्हारा ॥
(तर्ज : करती हूं तुम्हारा)