(लय -मेहंदी राचण लागी हाथा में)
घणा रूपाला बाईसा म्हारा थे हो सबसू न्यारा सा,
चाँद सरीखा प्यारा लागो थाकी नजर उतारा सा.
– ओढी-2 रे चुनरिया पीहर रेनाम री-२
आई शुभ घड़ी देखो म्हारे आंगण आज जी
बाजे बाजे शहनाई मायरे के नाम की
आई शुभ घड़ी देखो म्हारे आंगण आज जी, बीकाणे सू बनी चुनड़ी ,जोधाणे रंग वाईसा , जैपरियै से पोत मंगायो मोतियन सू मंडवाई सा
प्रेम प्रीत सू रंगाई मायरे केनाम की, आई शुभ घड़ी देखो म्हारे आंगण आजजी