Tap Ka Hum Karte Abhinandan

तप का हम करते अभिनंदन

(लय – कैसी वह कोमल काया रे….)
रचयिता – नचिकेता मुनि आदित्य कुमार
तप का हम करते अभिनंदन, गूंज रही आवाज। 
तप है सचमुच कितना पावन, गूंज रही आवाज। 
हिम्मत से खिलता तप उपवन, गूंज रही आवाज।
तप का काम निराला, कर सकता साहस वाला। 
तप से बनती काया कुन्दन ।। गूंज रही आवाज।
जो तप में रम जाता है, वह अदभुत सुख पाता है।
 तप से आता रिमझिम सावन ।। गूंज रही आवाज।
जो सहनशील होता है, तप बीज वही बोता है। 
तप से निर्मल बनता है मन ।। गूंज रही आवाज ।
सब रोग शोक मिट जाते, सुर-असुर सभी गुण गाते। मंगलमय बनता हर क्षण-क्षण।। गूंज रही आवाज ।
जिस नर ने कदम बढ़ाया, जीवन को धन्य बनाया। 
तप द्वारा होता आत्मरमण ।। गूंज रही आवाज ।

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