(तर्ज: मेरे गीत अमर कर दो)
जीवन का शुभ अवसर, तप ज्योति जलाई है। तप की महिमा गाते, कलियां विकसाई है ॥
१. तप कठिन साधना है हर एक न कर पाता।
आगम में गाई है जिसकी गौरव गाथा।
कितनों ने तप करके महिमा महकाई है ॥
२. जब भूख सताती है मन चंचल हो जाता।
नयनों की नींद उड़े, तब ढीला पड़ जाता।
आत्मिक बल जगने से ही हिम्मत आई है ॥
३. चंचल मन हम सबका नित दौड़ लगाता है।
प्रतिदिन खाते पीते, फिर भी ललचाता है।
अन्तर अनुराग जगे शुभ घड़ियां आई है ॥
४. मन उपवन सरसाता तप निर्मल जल धारा।
तप का जब दीप जले छा जाता उजियारा।
डुबकी तप धारा में ले लो सुखदाई है ॥
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