(तर्ज : रुणझुणियो)
तपस्या रो मेलो मंडयो इण नगरी में। छाई है अजब बहार, मोद मनाओ जी ॥
१. सावणियै में रिमझिम मेहड़लो बरसै, त्यूं तप री झड़ी सुहाय ॥
२. तप री करणी मोटी विरला कर पावै । हिम्मत स्यूं बेड़ो पार ॥
३. तप रै झीणै मारग वीर पुरुष चालै । कायर दिल रो के काम ॥
४. तप री गरिमा महिमा आगम में गाई। सन्मुख मंजिल तैयार ॥