तप रै झूलै में
तप रे झूलै में झूल्या आनन्द आव है,आनन्द आव है कि झूल्या आनन्द आव है, आनन्द आव है क मन म्हारो मोद मनाव है।तप रे झूले में झूल्या —
१. ऋषभ, अजित, संभव ,अभिनन्दन, सुमति ,पद्म सुखकारी
श्री सुपार्श्व ,चंदा प्रभु ,सुविधी, शीतल प्रभु भयहारी,
श्री श्रेयांस ,वासु पूज्य जिन न जन जन ध्यावै है। क झूल्याँ–
२. विमल अनन्त धर्म जिनवर श्री शाँति कुंथु उपकारी अर्हत अर मल्लि मुनि सुव्रत नमि जिन महिमा न्यारी, नेमी पारस वीर चरण में ‘शीष झुकावै है। क झूल्याँ–
3. आर्य भिक्षु श्री भारमल्ल, ऋषिराय जीत जयकारी, मघवा ,माणक ,डालगणी श्री कालू विभुता धारी, तुलसी महाप्रज्ञ जिन शासन जबर दिपावै है। क झूल्याँ–
४. अमृत कोदर भीम राम सुख शिव मुनि महा तपस्वी, महासती अणचा पन्नाँ रो जीवन बड़ो यशस्वी,
आरों सुमिरण भी कण कण में जोश जगावे है। क झूल्याँ–
५. तपो योग स्यूँ साधक देखो सँयम समता साधै
कष्ट सहन में प्रबल मनोबल मोक्ष मार्ग आराधै “भजन मण्डली” गीत सुणाकर भाव बढ़ावे है। क झूल्याँ–
६. तप रो महायज्ञ नगर में धूमधाम स्यूँ चालै, आन बान और शान स्यूँ साधक कड़ी चुनौत्याँ झालै, तेरापंथ संघ नन्दन बण ‘कनक’ सुहावे है। क झूल्याँ–
(तर्ज – झूला झूलण रो सावण)