Maitri Ke Anupam Deep Jale

मैत्री के अनुपम दीप जले, पर्युषण पर्व सुहाना है। श्रद्धा के सुरभित सुमन खिले, पर्युषण पर्व सुहाना है।
१. मुश्किल से मानव जन्म मिला। जिन शासन पा सौभाग्य खिला। तप जप करने वे क्षण उजले ॥
२. माला जपने मन टिका नहीं। ना सामायिक स्वाध्याय कहीं। अवसर है आराधन कर लें ॥
३. ये बीत रही जीवन घड़ियां । सांसों की टूट रही लड़ियां। मंजिल पाने अब चरण चले ॥
४. प्रभु तेरा एक मंगलमय नाम सहारा है। उजारा है। पा शरण तुम्हारी कष्ट टले ॥
५. भैक्षव शासन हमने पाया। महाप्रज्ञ चरण शीतल छाया। तुलसी तुलसी पल पल जप लें ॥
(तर्ज : अब रात गुजरने वाली)

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top