तपसी है घर बाग खिल्यो अन्तर मन से सपन फल्यो तपसी ने अब दर्शन देवण, आवो म्हारा स्वीमीजी, थे ही अन्तर्यामी जी, तप है मंगलकारी जी
पाप ताप सब नाश करें, जीवन में उल्लास भरे ,तपसी में विश्वास जगावण, आओ म्हारा स्वामी जी,तप है मंगलकारी जी
तन री ममता त्यागै तपसी, मन में समता राखै तपसी तपसी जी रा भाव बढावण अ
आओ म्हारा स्वामीजी
धीरे-धीरे चाले तपसी, मीठो मीठो बोलै तपसी तपरी उजली ज्योत जलावण, आओ म्हारा स्वीमीजी, तप है मंगलकारी जी
घर-घर में लागी रंग रलिया, गूंज उठी गीता स्यूं गलियां तपसी ने अमृत-रस- पावण, आओ म्हारा स्वामीजी तप है मंगलकारी जी.
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तपस्या री फुलवारी लागी, तपसी री पुनवानी जागी आया मंडल आज बधावण, आओ म्हारा स्वामीजी तप है मंगलकारी जी
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बाई रो मनड़ो हस्स्यो• तपस्या रो बादलियो बरस्यो आयो परिवार बधावण ने आओ म्हारा स्वीमीजी तप है मंगलकारी जी