Tapsya Ki Bahar

तपस्या की बहार, देखो के  छाई है, अट्ठाई की आज, इनको बधाई है 

शासन माता आती है, भाव जगा तो है, तपसन को रोज मां, शक्ति दे जाती है।

1. शासन माता को जो ध्यावे, मनवांछित फल वोही पावे 2-रूप अनुपम तेज निराला, मन को मेरे हरनेवाला शासन माता आती है –
2. धन्य हैं माता-पिता तुम्हारे, शासन माता की महिमा न्यारी, पूर्ण तपस्या हुई है तुम्हारी, शासन माता आती है –
3. आओ सब मिल मंगल गायें भव सिंधु से हम तर जायें: फिर हो कृपा तुम्हारीऽऽ ,अगले साल हो SS मासखमण की होऽऽ तैयारी,
शासन माता आती है –

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