तपस्या निराली रे
तपस्या निराली रे देखो, चमके है तपसी रो दीदार । संयम री शक्ति तपस्या निराली , रे। देखो खुल जावे सुरगां रा भी द्वार, मिट जावे जन्मा रा विकार संयम री शक्ति तपस्या निराली रे ।।
१. करड़ो काम तपस्या रो, विरला ही कोई कर पावै, नाम सुण्या ही जीवड़ो कांपै, धड़कन भी तो बढज्यावै दीखै है दिन में तारा, आंख्यां में । अंधियार, संयम री शक्ति त तपस्या निराली रे ।।
२. धीरै-धीरै चालै तपसी, धीरै-धीरै बोलै है, अपनी धुन में बैठ्यो-बैठ्यो, भीतर गांठा खोलै है। समता रा दीप जलावै, समता ही संयम री शक्ति, सुखकार, तपस्या निराली रे ।।
३. धर्म-ध्यान रो मेलोलाग्यो होड़ आहोड़ लगाई है गली-गली में तप री चर्चा शासन माता आई है।
भिक्षु रोशासण प्यारो, तुलसी रो आधार, संयम री शक्ति तपस्या निराली रे ॥
तर्ज : सावण आयो रे