तेरह मास री कठिन साधना-2 फिर आयो क्षण पावनियों, वर्षीतप रो पारणो आयो, रंग उड़ावों केसरियो-2
देखो धरती महक रही है-2 वैशाखा लगे मन भावनियो।।
वर्षीतप रो पारणो आयो, रंग उड़ाओ केसरिय-2,
1. देखो परम तपस्वी आये, फूल बरसाओ स्वागत में, सारी चिंता छोड़ दिए, जो लीन हुए प्रभु जप तप में
, नमन करो सादर अनुमोदन-2 वीर पुकारयो प्रागंणियों।। वर्षीतप रो पारणा आयो रंग उड़ाओ केसरियो-2
2. पूर्व कर्म के दोष से, जब नाथ श्रृषभ जी श्रमण बने, भटके घर-घर बिन बोले, आहार मिले तो व्रत खोलें,
कोई न समझा मौन संत का-2 श्रेयांश करायो पारणियो वर्षीतप रो पारणो आयो रंग उड़ाओ केसरियो-2
3. संयमता और धीरज की परिभाषा ही वर्षीतप है, आदिश्वर के दर्शन की अभिलाषा ही वर्षीतप है,
पुण्य कमाए जो कर जाऐ-2 वर्षीतप भव तारणियो।। वर्षीतप रो पारणो आयो रंग उड़ाओ केसरियो-2