वीर जयन्ती आज मनाएं मन मंदिर में दीप जलाएं प्रभु के झूम झूम गुणगाएं, उत्सव आया है
१. कुंडलपुर में प्रभुवर जन्मे । छाई खुशहाली कण कण में। माता मोद मनाए मन में, मंगल मंगल है…
२. प्रभु ने राजमहल को छोड़ा। भौतिकता से नाता तोड़ा। उत्कट तप में जीवन जोड़ा। उत्सव आया है…
३. उपसर्गों में समता भारी। संगम देव शक्ति भी हारी। जाते हैं हम सब बलिहारी। मंगल मंगल है…
४. अनेकान्त का ध्वज फहराया। मैत्री का संदेश सुनाया। मानवता का पाठ पढ़ाया। उत्सव आया है…
५. प्रभु का नाम सदा जयकारी। प्रभु का पथ है मंगलकारी। प्रभु का दर्शन भवभयहारी। मंगल मंगल है…