Aao Aao Bhikshu Swami

आवो आवो भिक्षू स्वामी

(लय : तेजा)
आवो आवो भिक्षु स्वामी ! अब तो म्हारै आंगणियै,
 ऊभा अड़ीकां कद का आपनै 
पक्ष उजलो तिथि है तेरस घट में म्हारै चान्दणियो, 
श्रद्धा रा फूल बिछावां सामनै ॥ स्थायी ॥
शब्द-शब्द और श्वास-श्वास में, भिक्षू री झणकार उठै। खातां पीतां सोतां उठतां, खोजां भिक्षु गया कठै 
दर्शन तो देणा पड़सी आपने ॥१ ॥
इसी जग्यां नहीं म्हारै घर में, जठै आपरो नाम नहीं। आँख्यां में उतरो तो स्वामिन ! पाऊँ मैं आराम सही।
 म्है तो नहीं भूलां थारै जापनै ॥२ ॥
कष्टां री काली रातां में एक आपरो ही शरणो । एकर तो संभाल्या सरसी बैठ्या कदका दे धरणो 
भव-भव में शरणों थांरो मांहने ॥३ ॥
ई कलयुग में आप सरीखा, संत पुरुष मिलणा मुश्किल । अपणै श्रम स्यूं ही पावै है, वीर पुरुष अपणी मंजिल । जग नै समझायी रात्यूं जागनै ॥४ ॥
थारै गण उपवन री शोभा लहर-लहर लहरावै है। गण गुम्बज पर आज देखल्यो, धर्म ध्वजा फहरावै है। ‘महाश्रमण’ सा मालिक मिलग्या मांहने ॥५ ॥

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top