माँ सच्चियाय
तर्ज – ओ फिरकी वाली..
आओ आओ, मैय्याजी बेगा आओ,
जीमो जी भोग लगाओ, है है छप्पन भोग तैयार जी, थांरा टाबरिया करे है मनुहार जी।।
केसरिया बर्फी, कलाकन्द, रबड़ी, पेड़ा, इमरती, बालुशाही,
लाडू बूंदिया, जलेबी, रसगुल्ला, गाजर पाक, रसमलाई,
गुलाब जामुन, शक्कर पारा-२,घेवर प्यारा प्यारा,
जीमो जीमो ,भावै तो और लिरावो, मैय्याजी भोग लगावो ।। है छप्पन भोग……
दालमोठ, पकोड़ी, कचोड़ी, भुजिया, पापड़, चिलड़ो
कढ़ी राबड़ी, साग सांगरी को,बाजरे को माँ खिचड़ो रायते में जीरा को तड़को-२, पीओ मार सबड़को
सागै काचरी की चटनी चटाओ, जीमो जी भोग लगावो । है छप्पन भोग….
आम,अमरूद,अंगूर, अनारस, आलू बुखारा, अनार धरया केला सेब पीता, रे चीकू, संतरा, मौसमी रसदार भरया काकडिया रे, लालमतीरा-२, और टमाटर, खीरा नींबू खाटो थे थोड़ो छिड़काओं, जीमी जी भोग लगायो
है छप्पन भोग……
कांजू,किशमिश,नोजा,खुरमानी,खोपरा,छुहारा,बादाम
लियो, जीम जुठ कर आचमण कर के, फिर थोड़ो आराम लियो, सौंफ, इलायची हाजिर कर दी-२, सागै मिसरी घर दी, कोई नागरीयो पान चबाओ, जीमो जी भोग लगायो।।
है छप्पन भोग….।।
छप्पन भोग परोस्या थांरा भगतां, मैय्या जी स्वीकार करो, “सरल” बावलो महिमा गावै, अन्न धन्न रो भण्डार भरो, लीला थांरी, सब जग जानी-२, थे हो शिव महारानी, बिगड़ी “लक्खा” की थे ही तो बणाओं, जीमो जी भोग लगायो।।
हे छप्पन भोग…….